मुंह कैसर का इलाज

मुख कैंसर का इलाज मुख रूप से उसके प्रकार तथा उसकी स्टेजिंग पर निर्भर करता है। स्टेजिग का निर्धरण कैंसर के साइज एवम् गले में उपस्थिति लसिका ग्रथियो में फैलाव तथा शरीर दूसरे हिस्से में फैलाव पर निर्भर करता है। मुंह के कैंसर के इलाज में शरीर में पहले से उपस्थित बीमारियों जैसे कि डायबिटीज , ब्लड प्रेशर आदि पर भी विचार किया जाता है,तथा मुंह में पहले से मौजूद आेएसएमएफ, लुकोप्लकिया, इयरोथोपलकिया, लाएकेन प्लनेस और बूरी आदतों जैसे कि स्मोकिंग, तंबाकू, हुक्का, पान/सुपारी, गुटका आदि का सेवन भी इलाज को प्रभावित करता है। मुंह के कैंसर में इलाज की सफलता मुख रूप से कैंसर की जल्दी पहचान पर निर्भर करता है।

सर्जरी- मुँह के कैंसर में सर्जरी एक कारगर तरीका है इसमें बीमारी के साथ एक सेन्टीमीटर और ज्यादा काटकर हटा दिया जाता है तथा गले से लासिका ग्रंथि को भी निकला जाता है और उसका पुननिर्माण कर दिया जाता है।
ऑपरेशन के बाद कई बार मरीजों को बोलने के लिए ,खाने के लिए विभिन्न रीहब्लिटेशन विधियो की भी जरुरत होती है।

विकरण चिकित्सा (रेडियोथेरेपी) सामान्यतः आपरेशन के बाद अगर मार्जिन कैंसर फ्री न हो या गाँठो में कैंसर हो ते रेडियोथेरेपी की जाती है। इसकी सुविधा, केजीएमयू, आर.एम.एल. और एस.जी.पी.जी. आई में उपलब्ध हैं। तथा कई बार सयुक्त रूप से कीमोथेरेपी/रेडियोथेरेपी भी दी जाती हैं।

  • रसायन चिकित्सा (कीमोथेरेपी)- अधिक विकसित ट्यूमर या सर्जरी जैसी परिस्थितियों में सामान्यतः इस विधि का प्रयोग किया जाता है।
  • रेडियोथेरेपी एवम् रसायन विधि द्वारा संयुक्त चिकित्सा का भी उपयोग किया जाता है।

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